सुल्तानपुर में ग्यारहवीं शरीफ शानू शौकत के साथ मनाया गया।।

 बड़े पीर की ग्यारहवीं शरीफ को सच्चाई दिवस के तौर पर मनाया गया ।

ओलमा ने दिया सच बोलने का पैगाम झूठ न बोलने का किया गया अहद।

ग्यारहवीं शरीफ


हर साल की तरह इस साल भी तहरीत मसलक ए आला हजरत की जानिब से ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर जुलूस गौसिया जामिया अरबिया खैराबाद से शुरू होकर असर के वक्त जामा मस्जिद चौक सुल्तानपुर पहुचा फिर वहां ओलमा और दानिश्वरो की मौजूदगी में परचम कुशाई हुई और मस्जिद के इमाम ओलमा किराम और सामाजिक कार्यकर्ताओं को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया ।सलातो सलाम से आगाज करके जामा मस्जिद के इमाम व खातीब हजरत मौलाना अब्दुल लतीफ साहब जुलूस को आगे बढ़ाया। यह जुलूस शाहगंज चौराहा होते हुए बाद मंडी होते हुए इशा से पहले पहले जामिया अरबिया खैराबाद पहुंच कर मुकम्मल हुआ ।फिर मगिरब बाद  तहरीक की जानिब से लंगर का इंतजाम था और इशा बाद मनकबत का मुकाबला था जुलूस को  खेताब करते हुए अकील अहमद कादरी उस्ताद अल जामिया तुल इस्लामिया रौनाही फैजाबाद ने बताया की गौसे आजम का नाम अब्दुल कादिर और कुन्नियत अबू मोहम्मद और लकब मोहियुद्दीन था एक रमजान 470 हिजरी में पैदा हुए उसी साला अपने पूरे महीने का रोजा रखा और रोजे के वक्त में आप मां का दूध नहीं पीते थे मशहूर कॉल के मुताबिक इसी महीने की 11 तारीख 561 में आप की वफात हुई अल्लाह तबारक ताला अपने महबूब बंधुओं को वह ताकतों को बताता फरमाता है जिसके जरिए से अपनी जिंदगी में भी गरीबों के सहारो कमजोर हो मुस्लिमों की मदद करते हैं और विशाल के बाद भी तसल्ली फरमाते हैं हनी मस्जिद का यह दिन सच्चाई दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है और सच बोलना चाहिए और झूठ से बचना चाहिए इस्लाम झूठ बोलने वालों पर लानत भेजता है किसी के साथ धोखा और फराड इस्लाम में जायज नहीं है इसलिए इस्लामी कानून और निजाम को फॉलो करना इंसानी फितरत और सच्चो का तरीका रहा है ।जलसे में मौलाना मोहम्मद अहमद वारसी ,मौलाना इश्तियाक अहमद कादरी जामिया अरबिया के तलबा के अलावा दिगर सामाजिक सियासी लोग मौजूद रहे ।नातिया मुकाबले में अंजुमन खुद्दामे नबी भुलकी ने पहला स्थान ग्रहण किया और आने वाली तमाम अनजुमनों को भी इनाम दिए गए। सैयद शाहिद सो भाई ने आने वाले तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया और मुबारकबाद में पेश की।

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