राम वनगमन पर खड़े होने वाले मजदूरों की जगह बदली, हालात नही।।

राम वनगमन पर खड़े होने वाले मजदूरों की जगह बदली: सुल्तानपुर में अब दरियापुर ओवर ब्रिज होगा श्रमिकों का ठिकाना, दशकों से शाहगंज चौराहे पर थे मिलते।।

सुल्तानपुर शहर के शाहगंज चौराहा दशकों से सुबह-सुबह गुलजार हुआ करता था। सैकड़ों श्रमिक यहां मजदूरी के लिए कतारों में खड़े होते थे। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर सजाये जा रहे राम वनगमन मार्ग पर दिखने वाले इन मजदूरों का ठिकाना प्रशासन ने बदल दिया है। ये सभी अब दरियापुर ओवर ब्रिज के नीचे नई जगह पर पाए जाएंगे।

ठंडी हो या गर्मी सुबह-सुबह पहुंच जाते थे मजदूर 

सुबह-सुबह खड़े सैकड़ों मजदूर, मोल-भाव करते ठेकेदार, बात पटी तो अपना-अपना टिफिन उठाकर ठेकेदार के साथ रवाना होते मजदूर। ये नजारा रोज सुबह शहर के शाहगंज चौराहे पर आम देखने को मिलता था। एक तरह से यहां मजदूरों की मंडी लगती है और भाव तय होने के बाद मजदूर काम पर चले जाते थे। किशोर से लेकर बुजुर्ग मजदूर तक यहां पर कुशलता के आधार पर दिहाड़ी पर मजदूरी के लिए ले जाए जाते थे। दिनभर हाड़तोड़ मेहनत के बाद मिलती तो सिर्फ डेढ़ सौ से ढाई सौ रुपए तक की मजदूरी ही है। इनमें से अधिकतर मजदूर तो श्रम विभाग की योजनाओं और अपने अधिकारों की जानकारी भी नहीं रखते।

शाहगंज चौराहे पर सुबह लगती थी घंटों भीड़


शहर में रोज आसपास के गांवों से 15 वर्ष से लेकर 60 वर्ष के बुजुर्ग तक मजदूरी के लिए आते हैं। शाहगंज चौराहे पर सुबह 7 बजे से 8.30 बजे तक ठेकेदारों का इंतजार करते थे। अधिकतर मजदूर तय दिन को साप्ताहिक मजदूरी के लिए ठेकेदार से अनुबंध कर लेते तो वहीं, कुछ मजदूर दिहाड़ी पर अलग-अलग ठेकेदारों के साथ मजदूरी के लिए जाते। लेकिन अब इनके ठेकेदार इन्हें काम के लिए लेने दशकों पुराने ठिकाने नहीं बल्कि नए ठिकाने पर आएंगे। जिसे प्रशासन ने इन्हें कल दिखा दिया है।


जस के तस हैं मजदूरों के हालात

आपको बता दें कि मई में विश्व मजदूर दिवस पर विभिन्न संस्थाएं, संगठन मजदूरों के हित में बात करते हैं और दूसरे दिन भूल जाते हैं। इन मजदूरों की हालत आज भी वैसी ही है जैसे पहले थी। ये और बात है दशकों से इन मजदूरों का बना ठिकाना भले ही प्राण प्रतिष्ठा की आड़ में बदल दिया गया हो लेकिन इनके हालत जस के तस हैं।

रिपोर्ट////सरफराज अहमद 

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