सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर तीसरे पायदान से आगे नहीं बढ़ पा रही सपा।।

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर तीसरे पायदान से आगे नहीं बढ़ पा रही सपा।।

कभी नहीं खुला पार्टी का खाता, कंडीडेट 'भीम निषाद' पर दांव खेल बढ़ाई गई भाजपा की मुशिकलें।।

इंडिया गठबंधन की ओर सुल्तानपुर सीट से सपा के 'भीम निषाद' कंडीडेट घोषित किए गए हैं। उन्हें मैदान में लाकर पार्टी ने भाजपा की मुश्किल इसलिए बढ़ा दी कि हाल के दिनों में ये वोट बैंक सत्तारूढ़ दल के पाले में रहा। हां 2019 के चुनाव को छोड़ इसके पहले के दो चुनाव में सपा तीसरे पायदान पर रही है। जिससे उबरना सपा और उसके प्रत्याशी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।


ब्राह्मण वोटरों को रिझाने में रहे कामायब तो मिल सकता है लाभ..


सपा कंडीडेट भीम निषाद का प्लस प्वाइंट ये है कि उनके अपने समाज का 1.15 लाख वोट है। इसमें से एक तिहाई से ज्यादा वोट यहां निवास करता है और वोटिंग में हिस्सा लेता है। उनके आगे अस्ल चुनौती है सपा के बेस मुस्लिम और यादव वोट को कन्वर्ट करने की। वही डॉ. घनश्याम तिवारी की हत्या के बाद से भाजपा से बड़ी संख्या में नाराज ब्राह्मण वोटर खफा है। इस मुद्दे को धार देने वाले पूर्व विधायक पवन पाण्डेय को जेल भेजना भी ब्राह्मण समाज को आहत कर गया है। ऐसे में इस वोट बैंक में वो जितनी सेंधमारी करेंगे उतना भाजपा को नुकसान होगा और इंडिया गठबंधन को फायदा हो सकता है।


राजा संजय सिंह की जब्त हुई थी जमानत।। 

बात 2019 लोकसभा चुनाव से शुरू की जाए तो इस चुनाव में भाजपा ने मेनका गांधी को मैदान में उतारा। उनके सामने बसपा-सपा गठबंधन से बसपा के सिंबल पर पूर्व विधायक सोनू सिंह मैदान में आए। मेनका को जहां 459,196 वोट मिले वही सोनू को 4,44,670 मिले। कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। राजा डॉ. संजय सिंह की जमानत जब्त हुई उन्हें 41,681 ही मत मिले। 

वरुण गांधी ने डेढ़ दशक बाद खिलाया भाजपा का कमल 

साल 2014 के चुनाव में भाजपा ने वरुण गांधी को चेहरा बनाया। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाया बाहुबली पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू और ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू ने, नतीजा ये रहा कि वरुण को 4,10,348 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज कराया। उन्होंने पूर्व विधायक पवन पाण्डेय जो बसपा के टिकट पर लड़ रहे थे उन्हें शिकस्त दी। पवन को 2,31,446 और तीसरे स्थान पर रहे सपा के शकील अहमद को 2,28,144 वोट मिले थे।


लंबे अरसे के बाद कांग्रेस को मिली थी जीतकर सीट 

वर्षों से हाशिये पर रही कांग्रेस ने 2009 में कृतिमान बनाया था। डॉ. संजय सिंह ने 3,00,411 वोट पाकर बसपा के पूर्व सांसद वर्तमान में इसौली से सपा विधायक ताहिर खान को हराया था। ताहिर को 2,01,632 मत मिले थे। इस चुनाव में भी सपा तीसरे नंबर पर थी, पूर्व विधायक स्व. अशोक पांडे को 1,07,895 मत ही प्राप्त हुए थे। यही नहीं भाजपा 2009 में चौथे पायदान पर थी।


कांग्रेस के कैप्टन शर्मा लूज कर गए थे चुनाव 

2004 में सपा यहां दूसरे स्थान पर पहुंची थी। इस चुनाव में बसपा के मोहम्मद ताहिर खान ने 2,61,564 मत हासिल कर वर्तमान में भाजपा एमएलसी सपा प्रत्याशी शैलेंद्र प्रताप सिंह को शिकस्त दी थी। सपा को 1,59,754 वोट मिले थे। इस बार के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा कांग्रेस से लड़े लेकिन 1,54,245 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा यहां चौथे स्थान पर थी। 


1999 में पहली बार बसपा ने खोला खाता 

इसी प्रकार 1999 के चुनाव में सपा दूसरे स्थान पर थी। बसपा के स्व. जयभद्र सिंह 1,73,558 मत पाकर सपा के राम लखन वर्मा से जीते थे। सपा को 1,58, 959 मत मिले थे। पूर्व विधायक पवन पाण्डेय निर्दलीय चुनाव लड़कर तीसरे और कांग्रेस की दीपा कौल चौथे स्थान पर थी। 


तीन चुनावों का मत प्रतिशत पर एक नजर 

पिछले तीन चुनाव के अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो 2019 के चुनाव में भाजपा को जहां 45.91 प्रतिशत मत पड़े वही सपा-बसपा गठबंधन को 44.43 मत पड़े थे। इस चुनाव में भाजपा पिछले चुनाव से जहां 3.39 वोट बढ़ सकी थी वही सपा-बसपा एक साथ आने के बाद 20.95 प्रतिशत मत बढ़कर हासिल कर ले गई थी। 2014 में भाजपा को जहां 42.52 मत मिले वही बसपा को 23.98 और सपा को 23.64 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। साल 2009 में बसपा को 28.48 और सपा को 15.24 प्रतिशत मत मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने लंबे अरसे के बाद एकाएक 42.44 प्रतिशत मत पाकर जीत का ताज अपने सिर बांधा था।

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